Venezuela वेनेजुएला में अमेरिकी सैन्य कार्रवाई और राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की गिरफ्तारी के बाद अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति Donald Trump डोनाल्ड ट्रंप गंभीर कानूनी और राजनीतिक विवादों में फंसते नजर आ रहे हैं। इस ऑपरेशन को लेकर न केवल अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विरोध हो रहा है, बल्कि खुद ट्रंप प्रशासन के भीतर भी मतभेद खुलकर सामने आ गए हैं।
Donald Trump ट्रंप प्रशासन इस कार्रवाई को “लॉ एनफोर्समेंट ऑपरेशन” बता रहा है, लेकिन सवाल यह है कि क्या किसी संप्रभु देश की जमीन पर की गई यह कार्रवाई वास्तव में कानून लागू करने तक सीमित थी या फिर यह एक सैन्य आक्रमण था?
रुबियो ने ट्रंप Donald Trump के बयान से बनाई दूरी
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो के ताजा बयान ने इस पूरे घटनाक्रम को और विवादास्पद बना दिया है। रुबियो ने ट्रंप के उस बयान से खुद को अलग कर लिया, जिसमें ट्रंप Donald Trump ने कहा था कि अमेरिका वेनेजुएला Venezuela को तब तक “चलाएगा” जब तक वहां सत्ता परिवर्तन पूरा नहीं हो जाता।
रुबियो ने सफाई देते हुए कहा,
“अमेरिका वेनेजुएला Venezuela को नहीं चला रहा, बल्कि यह तय कर रहा है कि आगे चीजें किस दिशा में जाएंगी। हमारे पास दबाव बनाने की क्षमता है।”
हालांकि, उनके इस बयान ने यह संकेत जरूर दिया कि अमेरिका वेनेजुएला Venezuela के भविष्य में सक्रिय भूमिका निभाने की योजना बना रहा है।
क्या कांग्रेस की मंजूरी के बिना हुआ सैन्य ऑपरेशन?
इस पूरे मामले का सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या अमेरिका ने कांग्रेस की अनुमति के बिना सैन्य कार्रवाई की?
रुबियो का कहना है कि यह कोई युद्ध या लंबा सैन्य अभियान नहीं था, इसलिए संसद की मंजूरी की जरूरत नहीं पड़ी। उनके मुताबिक, यह कार्रवाई एक ऐसे व्यक्ति की गिरफ्तारी के लिए की गई, जिस पर अमेरिका में ड्रग तस्करी और आतंकवाद जैसे गंभीर आरोप हैं।
लेकिन यह दलील ट्रंप Donald Trump प्रशासन के पुराने बयानों से टकराती दिख रही है।
पहले ‘युद्ध’ बताया, बाद में कार्रवाई कर दी
अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, नवंबर में व्हाइट हाउस की चीफ ऑफ स्टाफ सूजी वाइल्स ने साफ कहा था कि अगर Venezuela वेनेजुएला की जमीन पर हमला होता है, तो उसे युद्ध माना जाएगा और इसके लिए कांग्रेस की मंजूरी जरूरी होगी।
इतना ही नहीं, ट्रंप Donald Trump प्रशासन के अधिकारियों ने उस वक्त सांसदों को निजी तौर पर बताया था कि Venezuela वेनेजुएला में जमीनी हमले के लिए कोई ठोस कानूनी आधार मौजूद नहीं है।
इसके बावजूद, महज दो महीने बाद अमेरिका ने वही कदम उठा लिया, जिसे पहले गैरकानूनी और असंभव बताया जा रहा था।
‘बड़े पैमाने पर हमला’ और मादुरो की गिरफ्तारी
Donald Trump डोनाल्ड ट्रंप ने खुद इस कार्रवाई को “Venezuela वेनेजुएला के खिलाफ बड़े पैमाने पर हमला” बताया। इसी ऑपरेशन के दौरान राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी सिलिया फ्लोरेस को गिरफ्तार कर न्यूयॉर्क लाया गया।
मादुरो पर ड्रग तस्करी, आतंकवादी संगठनों से संबंध और अवैध हथियारों की सप्लाई जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं। फिलहाल वे न्यूयॉर्क के ब्रुकलिन स्थित मेट्रोपॉलिटन डिटेंशन सेंटर में बंद हैं।
कानूनी आधार बार-बार बदला गया?
इस कार्रवाई को लेकर Donald Trump ट्रंप प्रशासन की दलीलें लगातार बदलती नजर आ रही हैं। रिपब्लिकन सीनेटर माइक ली के अनुसार, रुबियो ने उन्हें बताया कि यह ऑपरेशन अमेरिकी कर्मियों की सुरक्षा के लिए जरूरी था, जो गिरफ्तारी वारंट को लागू कर रहे थे।
बाद में उपराष्ट्रपति जेडी वेंस, रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ और मार्को रुबियो ने भी यही तर्क दोहराया।
अंतरराष्ट्रीय कानून और संप्रभुता पर सवाल
आलोचकों का कहना है कि दुनिया में कई ऐसे नेता और अपराधी हैं, जिन पर अमेरिका में मुकदमे चल रहे हैं, लेकिन उन्हें पकड़ने के लिए अमेरिका आमतौर पर किसी संप्रभु देश पर सैन्य हमला नहीं करता।
यही वजह है कि यह कार्रवाई न केवल अंतरराष्ट्रीय कानून, बल्कि अमेरिकी संविधान और कांग्रेस की भूमिका पर भी गंभीर सवाल खड़े करती है।
तेल, शासन और असली मंशा?
Donald Trump ट्रंप प्रशासन इस कार्रवाई को कानून व्यवस्था से जुड़ा कदम बता रहा है, लेकिन खुद Donald Trump ट्रंप के बयान इस दावे को कमजोर करते हैं। ट्रंप ने कहा है कि अमेरिका कुछ समय के लिए वेनेजुएला Venezuela के प्रशासन में भूमिका निभाएगा और वहां के तेल ढांचे को दोबारा खड़ा करेगा।
उन्होंने कई बार वेनेजुएला Venezuela के तेल संसाधनों का जिक्र करते हुए कहा कि अमेरिका देश को “ठीक तरीके से चलाने” में मदद करेगा। इससे संकेत मिलता है कि मामला सिर्फ मादुरो की गिरफ्तारी तक सीमित नहीं है, बल्कि शासन और प्राकृतिक संसाधनों पर नियंत्रण की मंशा भी इसमें शामिल हो सकती है।
एक्सपर्ट्स क्या कहते हैं?
विशेषज्ञों के मुताबिक, अगर Donald Trump ट्रंप प्रशासन एक मजबूत कानूनी आधार पेश भी करता, तब भी इस तरह की कार्रवाई को सही ठहराना आसान नहीं होता।
इराक युद्ध के लिए 2002 में अमेरिकी संसद की मंजूरी ली गई थी और 9/11 के बाद आतंकवाद के खिलाफ युद्ध को भी कांग्रेस का समर्थन मिला था, लेकिन वेनेजुएला Venezuela के मामले में ऐसा कुछ नहीं किया गया।
कुछ जानकार इस कार्रवाई की तुलना 1989 के पनामा ऑपरेशन से कर रहे हैं, जब अमेरिका ने राष्ट्रपति मैनुएल नोरिएगा को ड्रग तस्करी के आरोप में गिरफ्तार किया था। उस समय भी ऑपरेशन को सीमित बताया गया था, लेकिन बाद में अमेरिकी जस्टिस डिपार्टमेंट ने माना था कि एफबीआई के पास इस तरह की कार्रवाई का अधिकार नहीं था।
