अनाथ बच्चे से शहीद उधमसिंह बनने की कहानी, इस अंग्रेज अफसर को उसी के देश में जाकर मारा!

Udham Singh :- देश की आज़ादी के कई किस्से हैं। कई क्रांतिकारियों के नाम इससे जुड़े हैं। इनमें से एक नाम है Udham Singh उधमसिंह। उधम सिंह Udham Singh से जुड़ी एक हकीकत भी है, जो शायद बहुत कम लोग जानते हैं। दरअसल, यह कहा और माना जाता है कि जलियावाला बाग त्रासदी के जिम्मेदार जनरल डायर को उधमसिंह ने मारा था। लेकिन हकीकत कुछ और है। भारत के शहीद उधमसिंह ने जनरल डायर को नहीं बल्कि लंदन जाकर किसी और अंग्रेज अफसर की हत्या की थी।

दरअसल, जलियावाला बाग हत्याकांड से व्यथित उधमसिंह ने कहा था- जिसने इस कांड पर अफसोस नहीं जताया, उसे उसके देश में ही जाकर मारुंगा।

हम बात करेंगे देश के उसी शहीद की जिसने एक अंग्रेज अफसर को उसी के देश में जाकर मारा और फिर आत्मसमर्पण किया। आप लोगो को जानकर हैरानी होगी, की गर्व भी कि उस वक्त उधमसिंह की उम्र सिर्फ 19 साल की थी।

कई नाम से जानते थे लोग

उनका असल नाम शेर सिंह था, लेकिन बाद में जब वे अनाथआलय गए तो उनका नाम उधम सिंह हो गया। इसके बाद उन्होंने अपना नाम राम मोहम्मद सिंह आजाद कर लिया। इस तरह वे कई नामों से जाने गए। उधम सिंह का जन्म 26 दिसम्बर 1899 को पंजाब के संगरूर जिले के सुनाम गांव में काम्बोज परिवार में हुआ था। जन्म के कुछ सालों बाद ही माता पिता की मौत हो गई। जिससे उन्हें बड़े भाई के साथ अमृतसर के एक अनाथालय में शरण लेनी पड़ी। वे बहुत बहादुर और निर्भय थे, इसलिए उनका नाम लोगो ने उधम सिंह रख दिया गया था।

और जलियावाला में बड़े भाई मारे गए

माता पिता की मौत के बाद अनाथालय में उधमसिंह ने ख़ुद को संभाला ही था कि जालियावाला बाग हत्याकांड में उनके बड़े भाई की भी मौत हो गई। उन्होंने प्रतिज्ञा ली कि वे जलियावाला बाग पर अफसोस नहीं जताने वाले को उसी के देश में जाकर मारेंगे। अपनी इसी प्रतिज्ञा को पूरा करने के लिए उन्होंने 1919 में अनाथालय छोड़ क्रांतिकारियों के साथ मिलकर आज़ादी की लड़ाई में शमिल हो गए थे।

आखिर क्यों ली प्रतिज्ञा?

अमृतसर के स्वर्ण मंदिर के पास जलियाबाग बाग़ में हजारों लोग इकट्टे हुए थे। उन लोगों को अनाथालय के कुछ बच्चे पानी पिला रहे थे। इन्हीं पानी पिलाने वालों में 19 साल के उधमसिंह थे जो अपने भाई के साथ वहीं मौजूद थे। लेकिन कुछ समय बाद जनरल डायर के आदेश पर ब्रिटिश सेनिकों गोली चलाने लगे थे जिसमें हजारों लोगों की जान गई थी। हत्याकांड की भयावहता ने उसे अंदर तक हिला के रख दिया। इसी से आहत होकर उधमसिंह ने जलियांवाला बाग़ की खून से सनी लाल मिट्टी को उठा कर प्रतिज्ञा ली कि वो इसका बदला लेकर रहेगा।

जनरल डायर को नहीं… इस अफसर को मारने का लिया था प्रण

लंदन में 13 मार्च 1940 के दिन एक बड़े से हॉल में एक बैठक चल रही थी। समापन के बाद पंजाब के गवर्नर माइकल फ्रेंसिस ओ’ड्वायर ने जो वक्तव्य दिया था उसकी तारीफ करते हुए लोग अपनी कुर्सियों से उठ कर जा रहे हैं। ठीक इसी दौरान दो गोलियों की आवाज़ आई और माइकल फ्रेंसिस ओ’ड्वायर नीचे गिरा पड़ा दिखा। सामने खड़े उधमसिंह के हाथ में बंदूक थी। लेकिन गोली चलाने के बाद वे भागे नहीं, बल्कि आत्मसमर्पण कर दिया। मिलते जुलते नाम के कारण यह एक आम धारणा है कि उधम सिंह ने जालियावाला बाग हत्याकांड के उत्तरदायी जनरल डायर को मारा था, लेकिन उधम सिंह ने लंदन जाकर जिसे गोली मारी वो ओ’ ड्वायर थे। जबकि गोलीबारी को अंजाम देने वाला जनरल डायर दिल के दौरे के साथ ही कई अन्य बीमारियों से उनकी मृत्यु होगी था।

कौन था माइकल ओड्वायर

13 अप्रैल 1919 को हुए जलियांवाला बाग़ हत्याकांड के समय माइकल फ्रेंसिस ओ’ड्वायर पंजाब का गवर्नर था और उसने जलियांवाला बाग़ हत्याकांड उचित ठहराया था। इसी के चलते उसे उधमसिंह ने उसी के देश में जाकर मारा। 4 जून 1940 को उधमसिंह को ओ’ड्वायर की हत्या का दोषी करार दिया गया था। 31 जुलाई 1940 को पेंटनविले जेल में उन्हें फांसी दे दी गई।