Sehore:- रुद्राक्ष महोत्सव का निरस्त होना शिवराज सरकार की गले की फांसी बनती जा रही है. जहां शासन प्रशासन ने अपनी गलतियों पर पर्दा डालने के लिए कथा वाचक पर दबाव बनाकर शिवपुराण कथा को ही खत्म कर दिया.
जहाँ इवेंट छोटा करते हुए पंडित मिश्रा की आंसुओं के साथ की गई भावुक अपील ने सरकार को बैकफुट पर ला दिया. मामले को लेकर प्रदेश की राजनीति गरमाई हुई है. वहीं जिला प्रशासन और पुलिस की लापरवाही भी सामने आई है.
देश भर में जहां शिवरात्रि का त्यौहार बड़ी ही धूमधाम से मनाया जाता हैं। उसी बीच मध्यप्रदेश के सीहोर (Sehore) जिले में शिवरात्रि के मौके पर धार्मिक भावनाओं को आहत करने का मामला सामने आया हैं.
शिवरात्रि महापर्व के मौके पर प्रसिद्ध कथावाचक पंडित प्रदीप मिश्रा द्वारा (Sehore) सीहोर स्थित आश्रम में 7 दिवसीय शिवपुराण कथा और रूद्राक्ष महोत्सव आयोजन किया जा रहा था. जहां शिवपुराण कथा में सम्मिलित होने लाखों भक्त पहुंचे थे, जिसके बाद इंदौर भोपाल हाईवे पर भारी जाम की स्थिति बन गई.
उक्त मामले में यह खुलासा हुआ कि पंडित प्रदीप मिश्रा ने ऑनलाइन कथा की परमिशन मांगी और बाद में जब को भी कोविड पाबंदियां हटी तो बकायदा ऑफलाइन कथा की परमिशन दी गई. और वह पुलिस ने ऑनलाइन कथा करने की सिफारिश को खारिज करते हुए प्रशासन ने भीड़ जुटाने की अनुमति दे दी.
लेकिन लंबा जाम लगने और उसमें मंत्रियों के फंसने के बाद आनन-फानन में प्रशासन ने पंडित प्रदीप मिश्रा से बात कर पुरानी चिट्ठी का हवाला दिया और कार्यक्रम स्थगित कर दिया. 11 फरवरी को कोरोना गाइडलाइन की पाबंदियां हटने के बाद एसडीएम सीहोर ने पुलिस की ऑनलाइन की कथा करने की बात को हटा दिया और पंडित मिश्रा को बकायदा परमिशन जारी कर दी.
मंत्रियों का काफिला बना परेशानी
रुद्राक्ष महोत्सव को कथित दबाव में स्थगित करने के पीछे मंत्रियों के जाम में फंसने का बड़ा कारण सामने आया है. दरअसल जब कोई पाबंदी नहीं है ऐसे में नेता अफसर बड़े-बड़े धार्मिक इवेंट्स में और रैलियों में शामिल हो रहे हैं.
आयोजन के पिछले दिन जैसे ही दो लाख से ज्यादा भीड़ आई तो प्रशासन के हाथ पैर तब फूल गए जब मंत्रियों के जाम में फसते ही सरकार तक फोन गुनगुनाने लगे. दबाव पड़ा तो प्रशासन ने पंडित मिश्रा को बताया कि आपके द्वारा इतने बड़े इवेंट की परमिशन ली गई.
उन्हें 7 फरवरी को भिजवाई गई चिट्ठी रिटर्न की गई और बताया आप तो ऑनलाइन कथा करने वाले थे. प्रशासन के भारी दबाव के बीच अत्यंत पंडित मिश्रा को कार्यक्रम स्थगित करने की घोषणा करनी पड़ी और वह मंच पर ही रो पड़े.
इज्तिमा पर रोक नही फिर शिवरात्रि पर क्यों?
उन्होंने कहा भोपाल में इज्तिमा का आयोजन होता है। लाखों लोग शामिल होते हैं. कई मंत्रियों को जाम में फंसना भी पड़ता है। लेकिन ऐसा कभी सुनाई नहीं दिया कि इज्तिमा को रोक दिया गया हो. क्या सीहोर प्रशासन इतना नाकारा था कि इस आयोजन की सूचना होने के बावजूद व्यवस्था जुटाई नहीं जा सकी.11 लाख रुद्राक्ष का अनुष्ठान है
तो श्रद्धालुओं की आवाजाही भी रहेगी? क्या सीहोर के प्रशासनिक अमले की इतनी हिम्मत है कि वो इतना बड़ा निर्णय कर ले? शिवरात्रि के इस महापर्व पर देश भर से आए शिव भक्तों की क्या गलती थी.
