नई दिल्ली। RBI Monetary Policy की बहुप्रतीक्षित बैठक के बाद भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने आम लोगों, उद्योग जगत और निवेशकों को बड़ा अपडेट दिया है। तीन दिवसीय मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक के बाद RBI Monetary Policy के तहत रेपो रेट को 5.25 प्रतिशत पर यथावत रखने का फैसला किया गया। इसके साथ ही केंद्रीय बैंक ने अपनी ‘न्यूट्रल’ (Neutral) नीति भी बरकरार रखी। यह फैसला ऐसे समय में आया है, जब वैश्विक स्तर पर ईरान से जुड़े भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों ने आर्थिक अनिश्चितता बढ़ा दी है।
RBI Monetary Policy में अन्य प्रमुख दरें भी रहीं स्थिर
RBI Monetary Policy के तहत रिजर्व बैंक ने केवल रेपो रेट ही नहीं, बल्कि अन्य प्रमुख ब्याज दरों में भी कोई बदलाव नहीं किया। Standing Deposit Facility (SDF) की दर 5 प्रतिशत, जबकि Marginal Standing Facility (MSF) और बैंक रेट को 5.5 प्रतिशत पर बरकरार रखा गया है।
RBI का कहना है कि मौजूदा आर्थिक परिस्थितियों में ब्याज दरों को स्थिर रखना विकास और महंगाई के बीच संतुलन बनाए रखने के लिए जरूरी है।
RBI Governor Sanjay Malhotra ने क्या कहा?
RBI Monetary Policy की घोषणा करते हुए आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि वैश्विक स्तर पर जारी अनिश्चितताओं के बावजूद भारत की अर्थव्यवस्था मजबूती दिखा रही है। हालांकि, ईरान से जुड़े भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें महंगाई के लिए चुनौती बनी हुई हैं।
उन्होंने कहा कि वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में भारतीय अर्थव्यवस्था का प्रदर्शन उम्मीद से बेहतर रहा है। निजी उपभोग मजबूत बना हुआ है और विनिर्माण क्षेत्र में भी सकारात्मक संकेत मिले हैं।
महंगाई को लेकर RBI Monetary Policy का आकलन
गवर्नर संजय मल्होत्रा ने बताया कि पहली तिमाही में वास्तविक महंगाई अनुमान से थोड़ी कम रही। हालांकि आने वाले महीनों में खाद्य पदार्थों और ईंधन की कीमतों के कारण हेडलाइन महंगाई बढ़ सकती है।
इसके बावजूद RBI ने FY27 के लिए खुदरा महंगाई (Retail Inflation) का अनुमान 5.1 प्रतिशत से घटाकर 5 प्रतिशत कर दिया है। वहीं कोर महंगाई फिलहाल नियंत्रित बनी हुई है और आगे इसमें नरमी आने की उम्मीद जताई गई है।
GDP ग्रोथ का अनुमान बढ़ाया
RBI Monetary Policy में भारतीय अर्थव्यवस्था को लेकर सकारात्मक संकेत भी दिए गए हैं। केंद्रीय बैंक ने FY27 के लिए वास्तविक GDP वृद्धि दर का अनुमान 6.6 प्रतिशत से बढ़ाकर 6.7 प्रतिशत कर दिया है।
RBI का मानना है कि मजबूत घरेलू मांग, निजी खपत और विनिर्माण क्षेत्र की बेहतर स्थिति आर्थिक विकास को गति दे रही है।
ईरान युद्ध और मानसून पर RBI की चिंता
आरबीआई गवर्नर ने कहा कि जुलाई के पहले सप्ताह से ईरान से जुड़े संघर्ष के दोबारा बढ़ने के कारण वैश्विक ऊर्जा बाजार में अस्थिरता बढ़ी है। कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव का सीधा असर महंगाई पर पड़ सकता है।
इसके अलावा उन्होंने एल नीनो (El Niño) और मानसून की अनिश्चितता को भी कृषि उत्पादन और खाद्य महंगाई के लिए बड़ा जोखिम बताया। यदि खाद्य और ईंधन की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी होती है, तो इसका व्यापक असर महंगाई पर पड़ सकता है।
विशेषज्ञों ने RBI Monetary Policy को बताया संतुलित फैसला
ग्रांट थॉर्नटन भारत के पार्टनर विवेक अय्यर ने RBI Monetary Policy पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि रेपो रेट को स्थिर रखना बाजार की उम्मीदों के अनुरूप है। उनके अनुसार, कोर महंगाई नियंत्रित है, जबकि महंगाई की अपेक्षाएं भी फिलहाल संतुलित बनी हुई हैं।
उन्होंने कहा कि RBI ने एक बार फिर विकास और मूल्य स्थिरता के बीच संतुलन बनाने की कोशिश की है। हालांकि खाद्य और ईंधन की कीमतें आगे भी केंद्रीय बैंक की निगरानी में रहेंगी।
आम लोगों पर क्या होगा असर?
RBI Monetary Policy के तहत रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं होने से फिलहाल होम लोन, कार लोन और अन्य बैंक ऋणों की ब्याज दरों में तत्काल बदलाव की संभावना कम है। जिन लोगों ने फ्लोटिंग रेट पर लोन लिया है, उनकी EMI फिलहाल पहले जैसी ही रहने की उम्मीद है।
हालांकि आने वाले महीनों में महंगाई, कच्चे तेल की कीमतों और वैश्विक परिस्थितियों को देखते हुए RBI आगे अपनी मौद्रिक नीति में बदलाव कर सकता है। फिलहाल केंद्रीय बैंक ने स्पष्ट संकेत दिया है कि वह आर्थिक विकास को गति देने के साथ-साथ महंगाई पर भी कड़ी नजर बनाए रखेगा।
