Narottam Mishra BJP में बढ़ी अंदरूनी नाराजगी, दतिया से उठी बगावत की आवाज
Narottam Mishra Datia (मध्य प्रदेश): दतिया की राजनीति में इन दिनों हलचल तेज हो गई है। भारतीय जनता पार्टी के भीतर असंतोष खुलकर सामने आता दिखाई दे रहा है। डॉ. नरोत्तम मिश्रा के समर्थन में जिले के कई पदाधिकारियों, जनप्रतिनिधियों और कार्यकर्ताओं द्वारा इस्तीफे दिए जाने की खबरों ने प्रदेश की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। इस घटनाक्रम के बाद भाजपा के संगठनात्मक समीकरणों और स्थानीय नेतृत्व को लेकर चर्चाओं का दौर तेज हो गया है।
केंद्रीय नेतृत्व को भेजा गया पत्र, प्रत्याशी बदलने की मांग
जानकारी के अनुसार, जिला अध्यक्ष सहित कई पदाधिकारियों और निर्वाचित जनप्रतिनिधियों ने भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व को पत्र भेजकर डॉ. Narottam Mishra को प्रत्याशी बनाए जाने की मांग की है। पत्र में कथित तौर पर कहा गया है कि यदि उनकी मांग पर विचार नहीं किया गया तो वे प्राथमिक सदस्यता से भी इस्तीफा देने पर विचार करेंगे। साथ ही अधिकृत प्रत्याशी का विरोध करने की चेतावनी भी दी गई है। हालांकि, इस संबंध में भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

मुख्यमंत्री Mohan Yadav के कार्यक्रम के बाद बढ़ी राजनीतिक चर्चा
हाल ही में मुख्यमंत्री डॉ. Mohan Yadav के दतिया दौरे के दौरान हुई नारेबाजी को लेकर भी राजनीतिक चर्चाएं तेज हैं। सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में इसे भाजपा के भीतर असंतोष से जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि, यह स्पष्ट नहीं है कि नारे लगाने वाले सभी लोग भाजपा के अधिकृत कार्यकर्ता थे या नहीं। इस पूरे मामले पर भी पार्टी की ओर से आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।
Narottam Mishra की राजनीतिक पकड़ बनी चर्चा का विषय
डॉ. Narottam Mishra लंबे समय तक दतिया की राजनीति का प्रमुख चेहरा रहे हैं। क्षेत्र में उनका मजबूत जनाधार और संगठन पर प्रभाव हमेशा चर्चा का विषय रहा है। ऐसे में उनके समर्थकों की नाराजगी की खबरों ने राजनीतिक समीकरणों को लेकर कई तरह के कयासों को जन्म दिया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि स्थानीय नेतृत्व की नाराजगी का असर भविष्य की राजनीतिक रणनीति पर पड़ सकता है।
सोशल मीडिया पर दावे और राजनीतिक बयानबाजी तेज
इस पूरे घटनाक्रम के बीच सोशल मीडिया पर विभिन्न प्रकार के दावे और राजनीतिक टिप्पणियां भी सामने आ रही हैं। कुछ लोग इसे भाजपा के अंदरूनी मतभेद बता रहे हैं, जबकि कुछ इसे स्थानीय राजनीति का स्वाभाविक हिस्सा मान रहे हैं। वहीं, विपक्ष भी इस घटनाक्रम को लेकर भाजपा पर निशाना साधने का प्रयास कर रहा है। हालांकि, सोशल मीडिया पर किए जा रहे कई दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
हाईकमान के फैसले पर बनी हुई है सबकी नजर
राजनीतिक हलकों में अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि भाजपा का केंद्रीय नेतृत्व इस पूरे मामले पर क्या रुख अपनाता है। फिलहाल पार्टी की ओर से प्रत्याशी बदलने या संगठनात्मक स्तर पर किसी बड़े निर्णय के संकेत नहीं मिले हैं। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि अंतिम फैसला केंद्रीय नेतृत्व के स्तर पर ही होगा और उसी के बाद दतिया की राजनीति की दिशा स्पष्ट होगी।
आने वाले दिनों में और तेज हो सकती है सियासी हलचल
दतिया में सामने आया यह घटनाक्रम केवल एक जिले की राजनीति तक सीमित नहीं माना जा रहा, बल्कि इसका असर प्रदेश की राजनीति पर भी पड़ सकता है। यदि इस्तीफों और विरोध का सिलसिला आगे बढ़ता है तो भाजपा के लिए स्थानीय स्तर पर नई चुनौती खड़ी हो सकती है। वहीं, यदि संगठन और नाराज नेताओं के बीच सहमति बनती है तो यह विवाद भी जल्द समाप्त हो सकता है। फिलहाल सभी की नजर भाजपा हाईकमान के अगले कदम पर टिकी हुई है।
