Kanker में पहले मादा भालू ने उजाड़ा परिवार, फिर कुएं में गिरा तेंदुआ; लगातार घटनाओं के बाद वन्यजीव रेस्क्यू सिस्टम पर उठे सवाल

Kanker। छत्तीसगढ़ के Kanker जिले में लगातार दो दिनों के भीतर हुई दो बड़ी वन्यजीव घटनाओं ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया है। पहले Kanker के मरकाटोला गांव में मादा भालू के हमले में एक ही परिवार के दो सगे भाई-बहन की मौत हो गई, जबकि उनकी तीसरी बहन गंभीर रूप से घायल हो गई। इसके अगले ही दिन Kanker के साईंमुंडा गांव में एक तेंदुआ कुएं में गिर गया, जिसे कई घंटे की मशक्कत के बाद रायपुर से पहुंची विशेषज्ञ टीम ने सुरक्षित बाहर निकाला। इन दोनों घटनाओं के बाद Kanker में वन्यजीव प्रबंधन और रेस्क्यू व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल उठने लगे हैं।

Kanker के मरकाटोला में मादा भालू का हमला, दो सगे भाई-बहन की मौत

जानकारी के अनुसार, Kanker जिला मुख्यालय से करीब 15 किलोमीटर दूर स्थित मरकाटोला गांव में हलाल खोर जुर्री अपने खेत के पास बैठे हुए थे। इसी दौरान एक मादा भालू ने अचानक उन पर हमला कर दिया। अचानक हुए हमले में वह गंभीर रूप से घायल हो गए।

उनकी चीख सुनकर उनकी बहन चमारोन बाई, जो स्कूल में रसोइया के रूप में कार्यरत हैं, अपने भाई को बचाने दौड़ीं। लेकिन मादा भालू ने उन पर भी हमला कर दिया। दोनों भाई-बहनों की आवाज सुनकर खेत में काम कर रही उनकी दूसरी बहन खोरीनबाई भी मौके पर पहुंचीं, लेकिन भालू ने उन पर भी हमला कर दिया। इस दर्दनाक घटना में हलाल खोर जुर्री और चमारोन बाई की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि खोरीनबाई गंभीर रूप से घायल हो गईं। उनका इलाज Kanker मेडिकल कॉलेज में जारी है।

चार घंटे तक शवों के पास डटी रही मादा भालू

घटना के बाद सबसे बड़ी चुनौती मृतकों के शवों को निकालना था। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, मादा भालू करीब चार घंटे तक शवों के पास डटी रही। जो भी व्यक्ति शवों के करीब जाने की कोशिश करता, भालू उस पर हमला करने दौड़ पड़ती।

स्थिति की गंभीरता को देखते हुए Kanker वन विभाग ने रायपुर से विशेषज्ञ रेस्क्यू टीम को बुलाया। कई घंटे बाद पहुंची टीम ने ट्रैंक्विलाइजर गन की मदद से मादा भालू को बेहोश किया। इसके बाद उसे सुरक्षित पिंजरे में बंद किया गया और तभी दोनों मृतकों के शवों को बाहर निकाला जा सका।

ग्रामीणों का कहना है कि घटना से एक दिन पहले मादा भालू के शावक की मौत हो गई थी। वन विभाग ने शावक के शव को अपने कब्जे में ले लिया था। ग्रामीणों का मानना है कि इसी वजह से मादा भालू बेहद आक्रामक हो गई थी।

अगले ही दिन Kanker में कुएं में गिरा तेंदुआ

भालू की घटना के अगले ही दिन Kanker के साईंमुंडा गांव में एक और बड़ा वन्यजीव रेस्क्यू ऑपरेशन चलाना पड़ा। गांव के एक गहरे कुएं में एक तेंदुआ गिर गया। सुबह ग्रामीणों ने तेंदुए को देखा और तुरंत वन विभाग तथा पुलिस को सूचना दी।

स्थानीय टीम ने कई घंटे तक तेंदुए को सुरक्षित निकालने का प्रयास किया, लेकिन सफलता नहीं मिली। आखिरकार रायपुर से विशेषज्ञ टीम को बुलाया गया। आधुनिक रेस्क्यू तकनीकों की मदद से कई घंटे की मेहनत के बाद तेंदुए को सुरक्षित कुएं से बाहर निकाला गया। राहत की बात यह रही कि इस दौरान तेंदुए को कोई गंभीर चोट नहीं आई।

लगातार दो घटनाओं ने खड़े किए बड़े सवाल

Kanker जैसे वन क्षेत्र वाले जिले में लगातार दो दिनों के भीतर भालू और तेंदुए से जुड़ी बड़ी घटनाएं सामने आने के बाद स्थानीय लोगों ने वन विभाग की तैयारियों पर सवाल उठाए हैं।

ग्रामीणों का कहना है कि यदि हर बड़े रेस्क्यू ऑपरेशन के लिए रायपुर से विशेषज्ञ टीम बुलानी पड़े, तो आपात स्थिति में कीमती समय बर्बाद होता है। भालू के मामले में चार घंटे तक शव नहीं निकाले जा सके, जबकि तेंदुए के रेस्क्यू में भी स्थानीय टीम को विशेषज्ञों का इंतजार करना पड़ा।

लोगों का सवाल है कि जब Kanker में घने जंगल हैं और यहां भालू, तेंदुआ, हाथी सहित कई वन्यजीवों की मौजूदगी रहती है, तो फिर वन्यजीव विशेषज्ञ और ट्रैंक्विलाइजिंग टीम केवल रायपुर तक ही सीमित क्यों हैं? क्या Kanker जैसे वन्यजीव बहुल जिलों में स्थायी विशेषज्ञ टीम की तैनाती नहीं होनी चाहिए?

स्थानीय स्तर पर विशेषज्ञ टीम की मांग तेज

इन घटनाओं के बाद Kanker के ग्रामीणों और सामाजिक संगठनों ने मांग उठाई है कि वन्यजीव बहुल जिलों में आधुनिक रेस्क्यू उपकरण, ट्रैंक्विलाइजर टीम और प्रशिक्षित विशेषज्ञों की स्थायी तैनाती की जाए। इससे किसी भी आपात स्थिति में तुरंत कार्रवाई संभव होगी और मानव जीवन के साथ-साथ वन्यजीवों की सुरक्षा भी सुनिश्चित की जा सकेगी।

फिलहाल Kanker में दोनों घटनाओं ने वन्यजीव प्रबंधन, रेस्क्यू व्यवस्था और वन विभाग की तैयारियों को लेकर एक नई बहस छेड़ दी है। अब देखना होगा कि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने और त्वरित रेस्क्यू व्यवस्था मजबूत करने के लिए प्रशासन और वन विभाग क्या ठोस कदम उठाते हैं।