Jabalpur जन्माष्टमी के मौके पर देशभर में अलग-अलग तरह की मटकी फोड़ प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जाता है, लेकिन मध्य प्रदेश के जबलपुर में होने वाली एक अनोखी प्रतियोगिता लोगों के आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। जबलपुर के कुआंखेड़ा गांव में करीब 10 साल से मटकी फोड़ने की ऐसी परंपरा चली आ रही है, जिसमें प्रतिभागियों को जमीन पर नहीं बल्कि तालाब के ऊपर रस्से पर लटकते हुए मटकी तक पहुंचना पड़ता है।
Jabalpur इस अनोखी प्रतियोगिता को देखने के लिए न केवल कुआंखेड़ा बल्कि जबलपुर और आसपास के इलाकों से भी बड़ी संख्या में लोग पहुंचते हैं। युवाओं के बीच इस प्रतियोगिता को लेकर खासा उत्साह देखने को मिलता है।
तालाब के ऊपर बंधा 120 फीट लंबा रस्सा
Jabalpur कुआंखेड़ा गांव में आयोजित होने वाली इस प्रतियोगिता की सबसे खास बात इसका तरीका है। तालाब के दोनों छोरों के बीच करीब 120 फीट लंबा रस्सा बांधा जाता है। इसी रस्से पर करीब 40 फीट की ऊंचाई पर मटकी लटकाई जाती है।
प्रतियोगियों को रस्से पर लटकते हुए एक छोर से दूसरे छोर की तरफ बढ़ना होता है। उनका लक्ष्य तालाब के ऊपर लटक रही मटकी तक पहुंचकर उसे फोड़ना होता है। ऊंचाई और नीचे मौजूद पानी के कारण यह चुनौती आसान नहीं होती। यही वजह है कि इसमें भाग लेने वाले युवाओं को शारीरिक रूप से मजबूत और तैराकी में दक्ष होना जरूरी माना जाता है।
सिर्फ तैराक युवाओं को मिलता है मौका
Jabalpur आयोजकों के मुताबिक प्रतियोगिता में सुरक्षा का विशेष ध्यान रखा जाता है। तालाब के ऊपर होने वाली इस प्रतियोगिता में ऐसे युवाओं को ही मटकी फोड़ने के लिए भेजा जाता है, जिन्हें तैराकी आती हो।
प्रतियोगिता के दौरान अगर कोई प्रतिभागी संतुलन बिगड़ने के कारण तालाब में गिर जाता है या किसी तरह की अनहोनी की आशंका दिखाई देती है, तो तत्काल मदद के लिए रेस्क्यू टीम भी तैनात रहती है। इसका उद्देश्य प्रतियोगिता के दौरान किसी भी संभावित दुर्घटना से निपटना है।
नशे में आने वालों को नहीं दी जाती प्रतियोगिता में भाग लेने की अनुमति
Jabalpur कुआंखेड़ा की इस अनोखी परंपरा का एक और महत्वपूर्ण पहलू नशे से दूरी का संदेश है। आयोजकों का कहना है कि अगर कोई प्रतिभागी शराब या किसी अन्य प्रकार के नशे का सेवन करके प्रतियोगिता में पहुंचता है, तो उसे मटकी फोड़ने की अनुमति नहीं दी जाती।
आयोजकों के मुताबिक इस प्रतियोगिता के पीछे सिर्फ मनोरंजन नहीं बल्कि युवाओं को नशे से दूर रहने और अपनी शारीरिक क्षमता को मजबूत बनाने का संदेश भी है। युवाओं में खेल भावना और दमखम बढ़ाने के उद्देश्य से इस आयोजन को लगातार आगे बढ़ाया जा रहा है।
करीब 10 साल से जारी है परंपरा
Jabalpur बताया जाता है कि कुआंखेड़ा गांव में करीब 10 साल पहले इस अनोखी मटकी फोड़ प्रतियोगिता की शुरुआत हुई थी। शुरुआत के बाद से धीरे-धीरे इसकी लोकप्रियता बढ़ती गई। अब जबलपुर और आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में युवा इस प्रतियोगिता में हिस्सा लेने पहुंचते हैं।
कई बार प्रतिभागियों की संख्या और लोगों के उत्साह को देखते हुए प्रतियोगिता दो से तीन दिन तक भी चलती है। मटकी फोड़ने के लिए युवाओं के बीच कड़ी चुनौती देखने को मिलती है। कोई प्रतिभागी सफल होकर मटकी फोड़ देता है तो वहां मौजूद लोग तालियों और उत्साह के साथ उसका स्वागत करते हैं।
दूर-दूर से प्रतियोगिता देखने पहुंचते हैं लोग
Jabalpur कुआंखेड़ा की यह अनोखी प्रतियोगिता अब स्थानीय आयोजन तक सीमित नहीं रह गई है। हर साल इसे देखने के लिए आसपास के गांवों और दूर-दराज के क्षेत्रों से भी लोग पहुंचते हैं। तालाब के ऊपर रस्से पर लटककर मटकी फोड़ने का दृश्य लोगों के लिए रोमांच से भरपूर होता है।
आयोजकों का कहना है कि हर साल प्रतियोगिता में हिस्सा लेने वाले युवाओं की संख्या बढ़ रही है। इसके साथ ही दर्शकों की संख्या में भी इजाफा हो रहा है। जन्माष्टमी के अवसर पर इस बार भी कुआंखेड़ा में प्रतियोगिता का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में युवाओं ने मटकी फोड़ने की कोशिश की।
परंपरा के साथ युवाओं को फिटनेस का संदेश
कुआंखेड़ा की यह मटकी फोड़ प्रतियोगिता धार्मिक उत्सव के साथ-साथ युवाओं को फिटनेस, अनुशासन और नशे से दूर रहने का संदेश भी देती है। तालाब के ऊपर रस्से पर लटककर मटकी तक पहुंचना अपने आप में शारीरिक ताकत, संतुलन और साहस की परीक्षा है।
आयोजकों का कहना है कि उनका उद्देश्य युवाओं को स्वस्थ गतिविधियों से जोड़ना और उनमें खेल भावना पैदा करना है। यही कारण है कि प्रतियोगिता में सुरक्षा व्यवस्था और नशे से दूरी को विशेष महत्व दिया जाता है।
जबलपुर के कुआंखेड़ा गांव की यह करीब एक दशक पुरानी परंपरा आज अपनी अनोखी शैली के कारण पहचान बना रही है। जन्माष्टमी पर होने वाली यह प्रतियोगिता जहां युवाओं के लिए अपनी ताकत और कौशल दिखाने का मौका बनती है, वहीं दर्शकों के लिए भी रोमांच और उत्साह से भरा अनुभव लेकर आती है।
