India-Nordic Summit में शामिल हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, लोकतंत्र और कानून के शासन को बताया साझेदारी की मजबूत नींव

India-Nordic Summit प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को आयोजित तीसरे इंडिया-नॉर्डिक समिट में भाग लेते हुए भारत और नॉर्डिक देशों के बीच बढ़ते सहयोग को नई दिशा देने की बात कही। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र, कानून का शासन और बहुपक्षवाद के प्रति साझा प्रतिबद्धता भारत और नॉर्डिक देशों को स्वाभाविक साझेदार बनाती है।

लोकतांत्रिक मूल्यों पर आधारित साझेदारी

India-Nordic Summit समिट के बाद जारी संयुक्त बयान में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत और नॉर्डिक देश समान शासन मूल्यों और वैश्विक स्थिरता के प्रति साझा दृष्टिकोण रखते हैं। उन्होंने आयोजन के लिए मेजबान देश नॉर्वे के प्रधानमंत्री का आभार जताया और सभी नॉर्डिक नेताओं का स्वागत किया।

प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत और नॉर्डिक देशों के बीच सहयोग केवल कूटनीति तक सीमित नहीं है, बल्कि यह नवाचार, अनुसंधान, शिक्षा और तकनीकी विकास के क्षेत्र में भी तेजी से आगे बढ़ रहा है।

कौशल विकास और टैलेंट मोबिलिटी पर जोर

India-Nordic Summit पीएम मोदी ने अपने संबोधन में विशेष रूप से स्किल डेवलपमेंट और टैलेंट मोबिलिटी को भविष्य की आर्थिक साझेदारी का अहम आधार बताया। उन्होंने कहा कि दोनों क्षेत्रों में सहयोग बढ़ने से नए रोजगार अवसर और आर्थिक संभावनाएं खुलेंगी।

भारत नॉर्डिक देशों की उन्नत तकनीकी और शिक्षा प्रणालियों से सीख लेते हुए ज्ञान आधारित साझेदारी को मजबूत करना चाहता है।

किन देशों ने लिया हिस्सा

तीसरे इंडिया-नॉर्डिक समिट में भारत के साथ पांच नॉर्डिक देशों के शीर्ष नेता शामिल हुए:

  • जोनास गाहर स्टोरे – प्रधानमंत्री, नॉर्वे
  • उल्फ क्रिस्टर्सन – प्रधानमंत्री, स्वीडन
  • पेटेरी ऑरपो – प्रधानमंत्री, फिनलैंड
  • मेटे फ्रेडरिक्सन – प्रधानमंत्री, डेनमार्क
  • क्रिस्ट्रुन फ्रोस्टाडॉटिर – प्रधानमंत्री, आइसलैंड

यह उच्चस्तरीय बैठक भारत और नॉर्डिक देशों के बीच रणनीतिक संबंधों को और गहरा करने की दिशा में अहम कदम मानी जा रही है।

व्यापार, निवेश और सप्लाई चेन पर फोकस

India-Nordic Summit विदेश मंत्रालय के अनुसार, इस यात्रा से भारत और नॉर्डिक देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार और निवेश संबंधों को नया प्रोत्साहन मिलेगा।

समिट में मजबूत और टिकाऊ सप्लाई चेन विकसित करने, हरित ऊर्जा, डिजिटल तकनीक और नवाचार आधारित आर्थिक सुरक्षा पर भी चर्चा हुई। हाल ही में हुए भारत-यूरोप व्यापार समझौतों को वास्तविक आर्थिक विकास में बदलने पर विशेष जोर दिया गया।

43 साल बाद ऐतिहासिक यात्रा

प्रधानमंत्री मोदी की यह यात्रा ऐतिहासिक मानी जा रही है क्योंकि 43 वर्षों बाद किसी भारतीय प्रधानमंत्री का नॉर्वे दौरा हुआ है। इससे पहले उन्होंने स्वीडन में द्विपक्षीय कार्यक्रमों में हिस्सा लिया था।

यूरोप दौरे का हिस्सा

प्रधानमंत्री मोदी का यह दौरा 15 से 20 मई तक चल रहे बहु-देशीय यूरोप एवं पश्चिम एशिया दौरे का हिस्सा है, जिसमें उन्होंने यूएई, नीदरलैंड, स्वीडन और नॉर्वे का दौरा किया। समिट के बाद वे अपनी यात्रा के अंतिम चरण के लिए इटली रवाना होंगे।