CM Mohan Yadav मध्य प्रदेश में औद्योगिक निवेश और रोजगार के अवसर बढ़ाने को लेकर राज्य सरकार लगातार निवेशकों से संवाद कर रही है। मुख्यमंत्री डॉ. CM Mohan Yadav के नेतृत्व में प्रदेश में अलग-अलग सेक्टर में निवेश आकर्षित करने की कोशिश की जा रही है। इसी कड़ी में ग्वालियर में प्रस्तावित Telecom Manufacturing Zone (TMZ) को लेकर निवेशकों के साथ रोड शो और बैठकें आयोजित की जा रही हैं।
CM Mohan Yadav ग्वालियर में प्रस्तावित टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग ज़ोन को लेकर केंद्र और मध्य प्रदेश सरकार के बीच जुलाई 2026 में समझौता हुआ था। इसके बाद दिल्ली और मुंबई में निवेशक रोड शो आयोजित किए गए। अब 22 सितंबर को बेंगलुरु में भी टेलीकॉम क्षेत्र के निवेशकों के साथ रोड शो प्रस्तावित है।
ग्वालियर में टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग ज़ोन
CM Mohan Yadav ग्वालियर में प्रस्तावित Telecom Manufacturing Zone को टेलीकॉम उपकरणों और उससे जुड़े कंपोनेंट्स के निर्माण के लिए एक बड़े औद्योगिक केंद्र के रूप में विकसित करने की योजना है। सरकारी जानकारी के मुताबिक, पहले चरण के लिए करीब 170 एकड़ जमीन चिन्हित की गई है। इस क्षेत्र में 24 से अधिक कंपनियों ने आवेदन प्रक्रिया शुरू की है।
प्रस्तावित TMZ में करीब ₹5,500 करोड़ के निवेश के प्रस्ताव सामने आए हैं। सरकार के अनुसार, इस परियोजना से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से 18,000 से अधिक रोजगार के अवसर पैदा होने की उम्मीद है। योजना में 24-25 टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स से जुड़ा औद्योगिक इकोसिस्टम विकसित करने की बात कही गई है।
दिल्ली और मुंबई के बाद बेंगलुरु में निवेशकों से संवाद
ग्वालियर के टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग ज़ोन में निवेश आकर्षित करने के लिए दिल्ली और मुंबई में निवेशक बैठकों का आयोजन किया जा चुका है। दिल्ली रोड शो में करीब ₹3,500 करोड़ के निवेश प्रस्ताव सामने आए थे, जिनसे लगभग 14,000 रोजगार के अवसरों की संभावना बताई गई थी। इसके बाद मुंबई में करीब ₹2,000 करोड़ के निवेश प्रस्ताव सामने आए, जिनसे लगभग 4,000 रोजगार अवसरों का अनुमान लगाया गया।
अब बेंगलुरु में टेलीकॉम सेक्टर के निवेशकों के साथ संवाद का कार्यक्रम रखा गया है। इसका उद्देश्य ग्वालियर के प्रस्तावित TMZ में निवेश और औद्योगिक भागीदारी को बढ़ावा देना है। सरकारी जानकारी के अनुसार, 22 सितंबर को बेंगलुरु में निवेशकों के साथ रोड शो में इस परियोजना से जुड़े अवसरों पर चर्चा होगी।
रोजगार सृजन पर CM Mohan Yadav का फोकस
CM Mohan Yadav ने प्रदेश में युवाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ाने के लिए औद्योगिक गतिविधियों के विस्तार पर जोर दिया है। सरकार का कहना है कि सिर्फ बड़े उद्योग ही नहीं, बल्कि MSME, हैवी इंडस्ट्री और लघु एवं कुटीर उद्योगों के विस्तार के जरिए भी स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर तैयार किए जा सकते हैं।
इस रणनीति के तहत प्रदेश के अलग-अलग शहरों में उद्योगों के लिए निवेश का माहौल विकसित करने और निवेशकों को आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने पर जोर दिया जा रहा है। ग्वालियर का टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग ज़ोन इसी औद्योगिक विस्तार की एक महत्वपूर्ण परियोजना के तौर पर सामने आया है।
टेलीकॉम सेक्टर में बढ़ेगा मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम
प्रस्तावित TMZ को केवल एक औद्योगिक इकाई के रूप में नहीं, बल्कि टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग के व्यापक इकोसिस्टम के रूप में विकसित करने की योजना है। इसमें टेलीकॉम उपकरणों के साथ-साथ विभिन्न कंपोनेंट्स के निर्माण से जुड़ी इकाइयां स्थापित होने की संभावना है।
सरकारी योजना के मुताबिक, इस क्षेत्र में मोबाइल डिवाइस, ऑप्टिकल फाइबर, टेलीकॉम उपकरण और अगली पीढ़ी की 5G/6G तकनीक से जुड़े विनिर्माण, रिसर्च और इनोवेशन को बढ़ावा देने की दिशा में काम किया जाएगा।
ग्वालियर में उपलब्ध तकनीकी मानव संसाधन को भी इस परियोजना के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सरकारी जानकारी के अनुसार, शहर में हर साल करीब 25,000 इंजीनियरिंग छात्र स्नातक होते हैं, जिससे टेलीकॉम और तकनीकी उद्योगों के लिए कुशल मानव संसाधन उपलब्ध हो सकता है।
MSME और छोटे उद्योगों के विस्तार पर जोर
मध्य प्रदेश सरकार की औद्योगिक रणनीति में बड़े निवेश के साथ MSME और छोटे उद्योगों को भी महत्वपूर्ण भूमिका दी जा रही है। छोटे और लघु उद्योगों के विस्तार से स्थानीय सप्लाई चेन मजबूत होने और बड़े उद्योगों से जुड़े सहायक कारोबार विकसित होने की संभावना रहती है।
CM Mohan Yadav का जोर प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में निवेश और उद्योगों के विस्तार के जरिए रोजगार के अवसर बढ़ाने पर है। ग्वालियर में टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग ज़ोन के अलावा प्रदेश के अन्य शहरों में भी औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ावा देने की कोशिश की जा रही है।
ग्वालियर के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह परियोजना?
ग्वालियर में प्रस्तावित TMZ से शहर को टेलीकॉम उपकरण निर्माण के क्षेत्र में नई औद्योगिक पहचान मिलने की संभावना है। करीब ₹5,500 करोड़ के प्रस्तावित निवेश और 18,000 से अधिक संभावित रोजगार अवसरों के कारण यह परियोजना स्थानीय अर्थव्यवस्था और रोजगार के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
हालांकि, निवेश प्रस्तावों और रोजगार के अनुमान को वास्तविक परिणामों से अलग समझना जरूरी है। कंपनियों द्वारा आवेदन और निवेश प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही परियोजनाओं की प्रगति और वास्तविक रोजगार सृजन का आकलन किया जा सकेगा।
फिलहाल मध्य प्रदेश सरकार का फोकस निवेशकों से लगातार संवाद, औद्योगिक इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करने और प्रदेश में रोजगार के अवसर बढ़ाने पर है। दिल्ली और मुंबई के बाद बेंगलुरु में होने वाला रोड शो इसी निवेश-आकर्षण अभियान का अगला चरण है।
