SIR विवाद पर BJP का पलटवार, चुनाव आयोग के समर्थन में उतरे रविशंकर प्रसाद

SIR नई दिल्ली: मतदाता सूची के Special Intensive Revision यानी SIR को लेकर जारी राजनीतिक बहस के बीच भारतीय जनता पार्टी ने विपक्ष के आरोपों पर पलटवार किया है। BJP नेता रविशंकर प्रसाद ने चुनाव आयोग का बचाव करते हुए कहा कि SIR से जुड़े फैसले चुनाव आयोग के पूर्ण आयोग ने सामूहिक रूप से लिए हैं।

Sir controversy

SIR यह बयान ऐसे समय आया है जब SIR की प्रक्रिया और चुनाव आयोग के कामकाज को लेकर विपक्षी दलों की ओर से सवाल उठाए जा रहे हैं। इससे पहले चुनाव आयोग ने भी स्पष्ट किया था कि आयोग के सदस्यों के बीच विचार-विमर्श के दौरान अलग-अलग सुझाव या टिप्पणियां होना सामान्य प्रक्रिया है और अंतिम फैसले सर्वसम्मति से लिए गए हैं।

SIR पर रविशंकर प्रसाद ने क्या कहा ?

SIR BJP नेता रविशंकर प्रसाद ने विपक्ष, खासकर कांग्रेस और राहुल गांधी की ओर से चुनाव आयोग पर लगाए जा रहे आरोपों के आधार पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि एक मीडिया रिपोर्ट के आधार पर चुनाव आयोग के खिलाफ आरोप लगाना उचित नहीं है।

SIR रविशंकर प्रसाद ने चुनाव आयोग के हालिया स्पष्टीकरण का हवाला देते हुए कहा कि बैठक में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के साथ दोनों चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी भी मौजूद थे। उनके मुताबिक SIR से संबंधित फैसले पूरे आयोग की सहमति से लिए गए हैं।

SIR चुनाव आयोग ने 23 सितंबर को जारी अपने आधिकारिक स्पष्टीकरण में भी कहा था कि आंतरिक टिप्पणियां, तकनीकी सुझाव और अलग-अलग विचार किसी भी बहु-सदस्यीय संस्था की सामान्य निर्णय प्रक्रिया का हिस्सा हैं। आयोग के अनुसार उसके आधिकारिक आदेश और फैसले कानूनी प्रक्रिया के तहत जारी किए गए हैं।

SIR क्या है और क्यों है चर्चा में?

SIR यानी Special Intensive Revision मतदाता सूची की विशेष गहन समीक्षा की प्रक्रिया है। इसका उद्देश्य मतदाता सूची को अपडेट करना और पात्र मतदाताओं को सूची में बनाए रखते हुए गलत, डुप्लीकेट या अपात्र प्रविष्टियों की पहचान करना है।

केंद्र सरकार द्वारा संसद में दी गई जानकारी के अनुसार, SIR अलग-अलग चरणों में राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में कराया जा रहा है। प्रक्रिया में बूथ लेवल अधिकारी यानी BLO घर-घर जाकर मतदाताओं से संबंधित जानकारी जुटाते हैं। दावे और आपत्तियां दर्ज कराने की प्रक्रिया भी इसमें शामिल है।

सुप्रीम कोर्ट के फैसले का भी दिया हवाला

रविशंकर प्रसाद ने SIR को लेकर सुप्रीम कोर्ट की कार्यवाही का भी जिक्र किया। केंद्र सरकार की ओर से संसद में दी गई जानकारी के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट ने 27 मई 2026 के अपने फैसले में SIR प्रक्रिया को चुनाव आयोग के वैधानिक अधिकार क्षेत्र और संविधान के अनुच्छेद 324 से संबंधित दायित्वों के संदर्भ में देखा था।

BJP नेता ने सवाल उठाया कि यदि SIR प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक दलों को आपत्ति थी, तो उन्होंने अदालत का रुख क्यों किया और इस प्रक्रिया पर लगातार सवाल क्यों उठाए जा रहे हैं।

चंद्रबाबू नायडू ने भी ECI के स्पष्टीकरण का किया समर्थन

आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने भी चुनाव आयोग के हालिया स्पष्टीकरण पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि आयोग के तीनों सदस्यों द्वारा सामूहिक रूप से निर्णय लेने की बात संवैधानिक संस्थाओं की कार्यप्रणाली को लेकर जारी चर्चा के बीच महत्वपूर्ण है।

नायडू ने कहा कि SIR से जुड़े फैसले सामूहिक रूप से और निर्धारित संस्थागत प्रक्रिया के तहत लिए जा रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि राजनीतिक मतभेदों के कारण चुनावी प्रक्रिया को लेकर जनता के विश्वास पर असर नहीं पड़ना चाहिए।

हालांकि, इससे पहले BJP के कुछ सहयोगी दलों के नेताओं ने भी SIR को लेकर उठ रहे सवालों पर चुनाव आयोग से स्थिति और स्पष्ट करने की मांग की थी।

चुनाव आयोग ने SIR प्रक्रिया में किए बदलाव

SIR को लेकर जारी बहस के बीच चुनाव आयोग ने अपनी प्रक्रिया में कुछ बदलावों की जानकारी भी दी है। आयोग के अनुसार, ऐसे मामलों में जहां रिकॉर्ड मैप नहीं हो पाए हैं या तार्किक विसंगतियां मिली हैं, वहां हर मामले में अनिवार्य ERO hearing की जरूरत नहीं होगी।

इसके बजाय BLO संबंधित मतदाता से संपर्क कर दस्तावेज जुटा सकते हैं और उन्हें ECINet पर अपलोड किया जा सकता है। जरूरत पड़ने पर सुनवाई की व्यवस्था की जाएगी और आयोग ने संवेदनशील वर्गों के लिए विशेष हेल्प डेस्क सहित कुछ अन्य कदमों की भी जानकारी दी है।

ECI ने यह भी कहा है कि उसके डिजिटल प्लेटफॉर्म और चुनावी रिकॉर्ड की सुरक्षा के लिए निर्धारित सुरक्षा और ऑडिट व्यवस्था लागू है।

SIR पर जारी है राजनीतिक बहस

फिलहाल SIR को लेकर चुनाव आयोग और राजनीतिक दलों के बीच बयानबाजी जारी है। चुनाव आयोग का कहना है कि उसके अंतिम फैसले पूर्ण आयोग की सर्वसम्मत मंजूरी से लिए गए हैं, जबकि विपक्षी दल प्रक्रिया को लेकर अलग-अलग सवाल उठा रहे हैं।

ऐसे में SIR, मतदाता सूची में बदलाव, दस्तावेजों की प्रक्रिया और दावे-आपत्तियों से जुड़े मुद्दे आने वाले दिनों में भी राजनीतिक और कानूनी चर्चा के केंद्र में रह सकते हैं।