South Zonal Council Meeting 2026: दक्षिण भारत के राज्यों से जुड़े कई अहम मुद्दों पर गुरुवार को दक्षिण क्षेत्रीय परिषद की 31वीं बैठक में विस्तार से चर्चा हुई। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में अंतरराज्यीय जल विवाद, लोकसभा सीटों का परिसीमन, नदी जल बंटवारा, बांध परियोजनाएं, राज्यों के बीच लंबित संपत्तियों और देनदारियों का बंटवारा तथा क्षेत्रीय कनेक्टिविटी जैसे विषय प्रमुख रहे।
South Zonal Council बैठक में अमित शाह ने राज्यों के बीच लंबे समय से चले आ रहे जल विवादों को बातचीत और आपसी सहयोग के जरिए जल्द सुलझाने की अपील की। वहीं, दक्षिणी राज्यों ने लोकसभा सीटों के परिसीमन को लेकर अपनी चिंताओं को सामने रखा। खास तौर पर कर्नाटक और तमिलनाडु ने मौजूदा 543 लोकसभा सीटों की संख्या को अगले 25 वर्षों तक बनाए रखने की मांग उठाई।
जल विवादों को बातचीत से सुलझाने पर अमित शाह का जोर
South Zonal Council दक्षिण क्षेत्रीय परिषद की बैठक में अंतरराज्यीय जल विवाद सबसे महत्वपूर्ण मुद्दों में से एक रहा। अमित शाह ने कहा कि अपने राज्य के हितों की रक्षा करना स्वाभाविक है, लेकिन यदि किसी विवाद के कारण दूसरे राज्य को वर्षों तक पानी से वंचित रहना पड़े और वही पानी समुद्र में बह जाए, तो इससे किसी भी राज्य का वास्तविक हित पूरा नहीं होता।
उन्होंने राज्यों से आग्रह किया कि जल विवादों को अदालतों या लंबे कानूनी संघर्षों तक सीमित रखने के बजाय बातचीत, संयुक्त बैठकों और आपसी सहमति के जरिए जल्द समाधान निकालने की दिशा में काम किया जाए।
अमित शाह के इस सुझाव को दक्षिण भारत के राज्यों की ओर से समर्थन मिलने की बात सामने आई है। बैठक में राज्यों ने जल संसाधनों के बेहतर प्रबंधन और आपसी सहयोग की आवश्यकता पर भी जोर दिया।
ब्रह्मपुत्र से कावेरी और गोदावरी को जोड़ने का सुझाव
South Zonal Council अमित शाह ने देश की नदियों को जोड़ने की संभावनाओं का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि यदि ब्रह्मपुत्र से लेकर कावेरी और गोदावरी तक प्रमुख नदियों को जोड़ने की दिशा में काम किया जाए, तो भारत लंबे समय तक पानी की कमी की चुनौती से बच सकता है।
उनके अनुसार, नदी जोड़ने की ऐसी परियोजनाओं से केवल सिंचाई और पेयजल की उपलब्धता ही बेहतर नहीं हो सकती, बल्कि देश में नए जलमार्गों के विकास की संभावनाएं भी पैदा हो सकती हैं।
शाह ने उत्तर भारत में लंबे समय से चले आ रहे नदी जल विवादों का उदाहरण देते हुए कहा कि कई विवाद ऐतिहासिक दौर से चले आ रहे थे और हाल के प्रयासों के जरिए इनके समाधान की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति हुई है।
परिसीमन को लेकर दक्षिणी राज्यों की बड़ी चिंता
South Zonal Council बैठक में लोकसभा सीटों के परिसीमन का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया गया। दक्षिणी राज्यों की सबसे बड़ी चिंता यह है कि यदि भविष्य में लोकसभा सीटों का पुनर्वितरण मुख्य रूप से मौजूदा जनसंख्या के आधार पर किया जाता है, तो जिन राज्यों ने जनसंख्या नियंत्रण में बेहतर प्रदर्शन किया है, उन्हें राजनीतिक प्रतिनिधित्व के स्तर पर नुकसान हो सकता है।
कर्नाटक और तमिलनाडु ने लोकसभा की मौजूदा 543 सीटों की संख्या को अगले 25 वर्षों तक बरकरार रखने की मांग रखी। कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने दक्षिणी क्षेत्रीय परिषद से प्रस्ताव पारित कर केंद्र के सामने कई मांगें रखने की बात कही।
इन मांगों में 1971 की जनगणना को परिसीमन के आधार के रूप में बनाए रखना, अगले 25 वर्षों तक लोकसभा की 543 सीटों को बरकरार रखना और महिलाओं के लिए आरक्षण को मौजूदा लोकसभा सीटों के भीतर ही लागू करना शामिल है।
इस मुद्दे को लेकर दक्षिणी राज्यों की चिंता आने वाले समय में राष्ट्रीय राजनीति में भी महत्वपूर्ण चर्चा का विषय बन सकती है।
मेकेदातु बांध परियोजना पर कर्नाटक का भरोसा
South Zonal Council बैठक में कर्नाटक और तमिलनाडु के बीच लंबे समय से चर्चा में रही मेकेदातु बांध परियोजना का मुद्दा भी सामने आया। कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने तमिलनाडु को भरोसा दिलाया कि परियोजना बनने की स्थिति में उसके हितों की रक्षा की जाएगी।
बैठक के बाद शिवकुमार ने कहा कि उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की मौजूदगी में तमिलनाडु और पुडुचेरी के हितों की रक्षा का भरोसा दिया है।
हालांकि, तमिलनाडु की ओर से यह स्पष्ट किया गया कि बैठक में कर्नाटक के साथ चल रहे कावेरी जल बंटवारे के विवाद पर चर्चा नहीं हुई। तमिलनाडु के मंत्री के अनुसार, कावेरी नदी जल विवाद या कावेरी जल विवाद न्यायाधिकरण से जुड़े मामलों को बैठक के एजेंडे में नहीं उठाया गया।
आंध्र प्रदेश ने रखा बुलेट ट्रेन कॉरिडोर का प्रस्ताव
South Zonal Council आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने बैठक में दक्षिण भारत की कनेक्टिविटी को मजबूत करने के लिए एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव रखा। उन्होंने आंध्र प्रदेश, कर्नाटक और तमिलनाडु को जोड़ने वाले बुलेट ट्रेन कॉरिडोर की बात कही।
प्रस्तावित कॉरिडोर को कुप्पम के रास्ते विकसित करने का सुझाव दिया गया। इसके साथ ही अमरावती, बेंगलुरु और चेन्नई को जोड़ने वाले ट्रांजिट नेटवर्क की आवश्यकता पर भी जोर दिया गया।
आंध्र प्रदेश और तेलंगाना ने राज्यों के बीच संपत्तियों और देनदारियों के बंटवारे से जुड़े लंबित मामलों को केंद्रीय गृह मंत्रालय के साथ बातचीत के जरिए सुलझाने पर सहमति जताई।
केरल ने उठाया मुल्लापेरियार बांध का मुद्दा
South Zonal Council केरल की ओर से बैठक में मुल्लापेरियार बांध से जुड़ा मुद्दा उठाया गया। केरल के मुख्यमंत्री वी.डी. सतीशन ने स्वास्थ्य, बुनियादी ढांचे, पर्यावरण संरक्षण और क्षेत्रीय सुरक्षा जैसे विषयों में राज्यों के बीच सहयोग बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया।
वहीं, तेलंगाना के उपमुख्यमंत्री मल्लू भट्टी विक्रमरका ने कृष्णा नदी के पानी पर राज्य के अधिकारों की सुरक्षा का मुद्दा उठाया। उन्होंने राज्य की प्रमुख सिंचाई परियोजनाओं के लिए केंद्र से सहयोग की मांग की।
पुडुचेरी की ओर से उपराज्यपाल के. कैलाशनाथन ने सालभर पानी की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए केंद्र और पड़ोसी राज्यों, विशेष रूप से तमिलनाडु, के बीच बेहतर समन्वय की आवश्यकता बताई। उन्होंने एकीकृत सतही जल व्यवस्था विकसित करने पर भी जोर दिया।
परिसीमन और जल विवाद पर आगे क्या?
South Zonal Council दक्षिण क्षेत्रीय परिषद की बैठक से यह स्पष्ट है कि दक्षिणी राज्यों के लिए जल संसाधन और राजनीतिक प्रतिनिधित्व दोनों बेहद संवेदनशील मुद्दे हैं। एक तरफ केंद्र सरकार राज्यों के बीच जल विवादों को बातचीत और सहयोग से सुलझाने पर जोर दे रही है, तो दूसरी तरफ दक्षिणी राज्य परिसीमन के संभावित प्रभावों को लेकर अपनी स्थिति स्पष्ट कर रहे हैं।
आने वाले समय में परिसीमन को लेकर केंद्र और दक्षिणी राज्यों के बीच बातचीत और तेज हो सकती है। वहीं, नदी जल विवादों के समाधान के लिए राज्यों के बीच संयुक्त प्रयास और नियमित संवाद को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। दक्षिण क्षेत्रीय परिषद की यह बैठक इसी दिशा में केंद्र और राज्यों के बीच समन्वय बढ़ाने की कोशिश के तौर पर देखी जा रही है।
